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गुरु और शिष्य !

Published-Sept. 5, 2020, 1:43 p.m.



Written By:Abhineet
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कबीर कहते हैं, 

 कबीर सात समुंदर की मसी करू, लेखनी करूं बणराय
 धरती का कागज करूं तो गुरु गुण लिखा न जाए||

 अथार्त - कि अगर मैं सभी सात समुद्रों की स्याही, जंगलों के सभी पेड़ों की एक कलम पृथ्वी का कागज बनाता हूं, तब भी गुरु के सभी गुणों को लिखा जाना संभव नहीं हैं |

 हमारी जिंदगी में शिक्षक का स्थान बहुत ही विशिष्ट हैँ, जो हमें अंधकार रुपी अज्ञान से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाकर के हमारे जीवन को सफल बनाते हैं|

 शिक्षक ज्ञान प्रदान करते हैं, जो हम में सही समझ स्थापित करता है|  हमें जीवन में किसी भी प्रकार की कठिनाईयों से लड़ने के लिए बहुत ताकत से हमें पिरोते हैं| हमारे जीवन में शिक्षकों की उपस्थिति हमारे शैक्षणिक सामाजिक और आध्यात्मिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है |

 इतिहास उन उदाहरणों से भरा है जो प्रदर्शित करता है कि कैसे एक शिष्य अपने जीवन में शिखर तक पहुंचता है, अपने गुरु के प्रति असाधारण सम्मान विनम्रता समर्पण और भक्ति के कारण| चाणक्य और चंद्रगुप्त, द्रोणाचार्य और अर्जुन,  शिवाजी और रामदास आदर्श गुरु शिष्य संबंध के कुछ प्रतिष्ठित उदाहरण हैं|यह उदाहरण प्रसिद्ध है शिष्य की उपलब्धियों के कारण नहीं, क्योंकि उन्हें उस दिव्य पुण्य बंधन के लिए याद किया जाता है जिसे शिष्य ने अपने गुरु के साथ साझा किया था|

 दुर्भाग्य से आज बदलते समय के साथ, इन गुणों को पीछे ले जाने के लिए देखा जाता है| देखते हैं कई स्थानों पर छात्र खुलेआम बदतमीजी करते हैं या अपने शिक्षकों की आलोचना करते हैं| यह कतई सही नहीं है | हमें पता होना चाहिए कि ऐसा करने में हमारी खुद की हानि है |


 गुरु में दोष देखने या उनकी आलोचना करने से,हम सिर्फ कुछ ही समय में अपने सभी गुणवत्ता को बर्बाद कर सकते है| शिष्य के सभी प्रयास और उपलब्धियां बेकार चली जाती हैं | ऐसा करना न केवल भारी अवगुण कर्म को बाँधता  है,  बल्कि जीवन में उनकी प्रगति  में भी बाधा डालता है |

तो आइए इस शिक्षक दिवस हम ये सुनिश्चित करते हैं की वैदिक काल से एक गुरु को जो दर्जा दिया जा रहा है उसे उतना ही आदर देते हुए और निखारेंगे, ताकि कलयुग में भी अर्जुन और शिवाजी जैसे शिष्यों की कमी ना रह जाए।

Last Edit - Sept. 5, 2020, 1:59 p.m.

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