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छठ पूजा क्यों खास है?

Published-Nov. 17, 2020, 12:53 a.m.



Written By:vasundhra
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छठ पूजा खास है,
क्योंकि छठ एक एहसास है।

भले ही छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय के साथ होती है लेकिन उसके लिए उमंग हमेशा रहती है। जब बिहार से बाहर रह रहे लोग छठ पूजा में अपनी दादी या नानी के पास आते हैं तब उनसे फिर अगली बार छठ में वापस आने का वादा किए बिना नहीं जा पाते हैं,
छठ एक अपनापन है।

नहाय खाय के अगले दिन छठ व्रती अपने घर परिवार और अपने बच्चों के सुख के लिए खरना का पूजा करती है और उसके प्रसाद के आगे सब कुछ फिका लगने लगता है,
छठ वो आस्था है।

निर्जला व्रत रखके बिना थके प्यार से ठेकुआ और अन्य प्रसाद तैयार कर सूप और दौरा सजा के पोखर, तालाब या नदी के अंदर सूर्य देवता के डूबने और उगने पर अर्घ्य देकर व्रत तोड़ने का एक अलग उत्साह है,
छठ एक विश्वास है।

बिना पुरोहित के संपन्न हुए इस पूजा में सूप, दौरा, डलिया, बद्धी बनाने वाले और फल वालों के बिना ये पूजा अधूरी है और वो इस समाज के लिए बहुत खास है,
छठ इस बात का प्रतीक है।

जब लोग पूरी मेहनत करने के बाद भी हर तरफ से उम्मीद हार जाते हैं, तब भी वो अपनी छठ मां पर से विश्वास नहीं खोते और अपनी टूटती आवाज में ये गुहार लगाते हैं कि 'अगर ये हो गया तो हम भी छठ करेंगे,'
छठ वो आस है।

जब एक मां, एक पिता अपने दूर गए बेटा, बेटी का एक साल से इंतजार कर रहे होते हैं और उनके आते ही उनका घर और वो फिर से खिल उठते हैं,
छठ वो प्यार है।

हमें ये बताना कि एक नई सुबह और हर दिन के सूर्योदय के साथ सूर्यास्त भी जीवन का एक हिस्सा है,
छठ वो त्योहार है।

छठ के गीत में जो ताजगी और जो सुकून है वो अतुलनीय है।
छठ पूजा एक महापर्व है।

Last Edit - Nov. 17, 2020, 2:06 p.m.

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